Monday, 12 September 2011

आम आदमी को तो मरना ही है.........

      मुंबई और दिल्ली  में हुए विस्फोट के बाद सरकार हर बार की तरह इस बार फिर अपने पुराने रटाए वादे दोहरा रही है!  सवाल उठता है कि  पहले के धमाकों के आरोपी  ज्यादातर तो पकडे ही नहीं गए और जो पकडे भी  गए  उनको बिरयानी खिलाई जा रही! अब जब इनको पकड़  के बिरयानी  ही खिलानी  है,  कोई सज़ा -वजा  इनको देनी नहीं है, तो   फिर  जनता से झूठे वादे ही क्यों करते हैं?  आम आदमी को तो मरना ही है! मरने दो!  जिस दिन कोई  बड़ा नेता  विस्फोट की चपेट में आएगा  उस दिन पता चलेगा आतंकवाद पीडतों का दर्द क्या होता है!

1 comment:

  1. बिल्कुल सही बात है! अगर नेता लापरवाह और ग़ैर ज़िम्मेदार न होते तो ये दिन न देखने पड़ता! नेता लोगों की नीयत में भी खोट है! अगर इनकी नीयत सही होती पकड़े गए आतंकवादियों को तो कम से कम वो सज़ा मिलती जिसके वो 'लायक़' है!

    ReplyDelete