भारत में बुजुर्गों को सदा ही सम्मान की नजरों से देखा जाता रहा है! घर में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले बड़े बुजर्गों से सलाह लेना महान भारतीय परम्परा का एक अहम हिस्सा रहा है! ऐसा भी नहीं है कि आज ये परंपरा खत्म हो चुकी है लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से समाज बदला है उसमें हमारे बुजुर्गों की भूमिका काफी सीमित हो गई है ! आज एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है जिसमें वृद्धों के लिए कोई जगह नहीं है जोकि काफ़ी दुखद स्थिति है! अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर अगर हम अपने बुजुर्गों को वो प्यार और सम्मान देने का संकल्प ले जिनके वो हक़दार है तभी ये दिवस प्रासंगिक होगा अन्यथा नहीं !
Achhi baat likhi hai! Navraatri ki shubhkaamnaayen!
ReplyDeleteSaarthak vichar.....
ReplyDeletevirdhon ke prati aapke man me jo samman hai hai. yah prashansniy hai.
ReplyDeleteआदरणीय विरेन्द्र जी, मोनिका जी और गोपाल तिवारी जी.
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आने और अपने विचार रखने के लिए आपका ह्रदय से आभार! आगे भी इसी तरह अपना आशीर्वाद बनाएगा .
सुन्दर सार्थक प्रस्तुति .
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