Tuesday, 27 September 2011

नवरात्रि के शुभ अवसर पर शुभकामनाएँ!

प्रिय ब्लॉग पाठकों, आप सभी को 
             'नवरात्रि'
के शुभ अवसर पर शुभकामनाएँ! 

माँ का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे! 
ऐसी कामना करता हूँ!  जय माता दी




Thursday, 22 September 2011

आरक्षण की वैशाखी क्यों ?



एक बार फिर से नेताओं ने आरक्षण की वैशाखी का सहरा लेना शुरू कर दिया हैं !   पहले उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती  ने  इसके लिए  प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जिसमें  उन्होंने  मुस्लिमों , जाटों और   गरीब सवर्णों   को आरक्षण देने के लिए  संविधान में संशोधन करने की  अपील प्रधानमंत्री  से की थी! जिसके जवाब में  केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिमों के लिए आरक्षण देने पर विचार कर रही है!  सवाल उठता है कि आखिर चुनाव के मौके पर ही  नेताओं को आरक्षण की याद क्यों आती है? ज़ाहिर है चुनाव जीतने  के लिए!  यानी की वोट के लिए !  दूसरी बात क्या आरक्षण से  गरीब लोगों की सभी  समस्यायों का समाधान हो जाएगा ?   आखिर कब तक नेता लोग चुनाव जीतने की लिए आरक्षण की  वैशाखी का सहारा लेते रहेंगे?

Wednesday, 14 September 2011

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ!

सर्वप्रथम  आप सभी लोगों  को  हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ! मुझे गर्व है कि मै एक हिन्दुस्तानी हूँ और हिंदी मेरी मातृभाषा है ! मगर दुःख इस बात का है कि आज भी हिंदुस्तान के  अधिकांश लोग  अपनी मातृभाषा हिंदी  को वो सम्मान नहीं देते जिसकी  वो हक़दार है ! बड़े  दुःख की बात है ! जहाँ तक मुझे लगता है की मेरे देशवाशियों को हिंदी बोलने में शायद शर्म लगती है इसीलिए तो आज अधिकांश लोग हिंदी कम और अंग्रेजी  भाषा को ज्यादा महत्त्व  देते  हैं  ! 

हम राष्ट्रकवि भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन  पंक्तियों को भी भुला  चुके हैं......जिनमें उन्होंने निज भाषा को ही उन्नति का कारण बताया है -


                   निज भाषा उन्नति अहे , सब उन्नति को मूल 
                   बिन निज भाषा ज्ञान के , मिटे न कोई न सूल

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Monday, 12 September 2011

आम आदमी को तो मरना ही है.........

      मुंबई और दिल्ली  में हुए विस्फोट के बाद सरकार हर बार की तरह इस बार फिर अपने पुराने रटाए वादे दोहरा रही है!  सवाल उठता है कि  पहले के धमाकों के आरोपी  ज्यादातर तो पकडे ही नहीं गए और जो पकडे भी  गए  उनको बिरयानी खिलाई जा रही! अब जब इनको पकड़  के बिरयानी  ही खिलानी  है,  कोई सज़ा -वजा  इनको देनी नहीं है, तो   फिर  जनता से झूठे वादे ही क्यों करते हैं?  आम आदमी को तो मरना ही है! मरने दो!  जिस दिन कोई  बड़ा नेता  विस्फोट की चपेट में आएगा  उस दिन पता चलेगा आतंकवाद पीडतों का दर्द क्या होता है!