Saturday, 16 April 2011

धोनी को ही 'उत्तराखंड रत्न' क्यों ?



विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड रत्न देने की घोषणा की है. लेकिन क्या सही मायनों में केवल धोनी ही इस सम्मान के हकदार हैं ? क्या धोनी को यह सम्मान केवल विश्व विजेता टीम से अपना नाम जोड़ने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षा का परिणाम है? अगर नहीं तो उत्तराखंड के ऐसे कई सपूत हैं जिन्होने राज्य के कल्याण और विकास के लिए अपना पूरा जीवन ही लगा दिया. राज्य सरकार उनकी सुध क्यों नहीं लेती?  मुझे नहीं याद की महेंद्र सिंह धोनी ने आज तक कभी भी खुद को उत्तराखंडी कहा हो. मैं व्यक्तिगत रूप से धोनी का सम्मान चाहता हूँ लेकिन साथ ही मेरा ये भी सोचना है कि केवल राज्य सरकार के वजाय धोनी भी इस बात को स्वीकार करें कि उत्तराखंड उनका मूल राज्य है और इस देवभूमि में जन्म लेकर वे गर्व का अनुभव करते हैं. वैसे प्रदेश सरकार को ये भी नहीं भूलना चाहिए की इसी राज्य के कई लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है....गढ़वाल एक्सप्रेस के नाम से प्रसिद्ध सुरेन्द्र भंडारी हों या अशोक चक्र विजेता स्व. भवानी दत्त जोशी...क्या ये लोग इस सम्मान के हकदार नहीं हैं? या फिर राज्य सरकार  इन्हें इस सम्मान के लायक नहीं मानती!  क्योंकि इन्हें  सम्मान देने पर वह न्यूज़ राष्ट्रीय चैनलों मैं फ्लैश नहीं होगी...अख़बारों मैं लीड नहीं छपेगी.......और ऐसा राज्य सरकार नहीं चाहती.

1 comment:

  1. Right. It's a fact. Congrats! and welcome in BLOGGING World. May GOD bless you with success, happiness, peace, Health and Wealth.

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