भारत में बुजुर्गों को सदा ही सम्मान की नजरों से देखा जाता रहा है! घर में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले बड़े बुजर्गों से सलाह लेना महान भारतीय परम्परा का एक अहम हिस्सा रहा है! ऐसा भी नहीं है कि आज ये परंपरा खत्म हो चुकी है लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह से समाज बदला है उसमें हमारे बुजुर्गों की भूमिका काफी सीमित हो गई है ! आज एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है जिसमें वृद्धों के लिए कोई जगह नहीं है जोकि काफ़ी दुखद स्थिति है! अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर अगर हम अपने बुजुर्गों को वो प्यार और सम्मान देने का संकल्प ले जिनके वो हक़दार है तभी ये दिवस प्रासंगिक होगा अन्यथा नहीं !
तस्वीर
Saturday, 1 October 2011
Tuesday, 27 September 2011
नवरात्रि के शुभ अवसर पर शुभकामनाएँ!
प्रिय ब्लॉग पाठकों, आप सभी को
'नवरात्रि'
के शुभ अवसर पर शुभकामनाएँ!
'नवरात्रि'
के शुभ अवसर पर शुभकामनाएँ!
माँ का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे!
ऐसी कामना करता हूँ! जय माता दी
ऐसी कामना करता हूँ! जय माता दी
Thursday, 22 September 2011
आरक्षण की वैशाखी क्यों ?
एक बार फिर से नेताओं ने आरक्षण की वैशाखी का सहरा लेना शुरू कर दिया हैं ! पहले उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मुस्लिमों , जाटों और गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करने की अपील प्रधानमंत्री से की थी! जिसके जवाब में केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिमों के लिए आरक्षण देने पर विचार कर रही है! सवाल उठता है कि आखिर चुनाव के मौके पर ही नेताओं को आरक्षण की याद क्यों आती है? ज़ाहिर है चुनाव जीतने के लिए! यानी की वोट के लिए ! दूसरी बात क्या आरक्षण से गरीब लोगों की सभी समस्यायों का समाधान हो जाएगा ? आखिर कब तक नेता लोग चुनाव जीतने की लिए आरक्षण की वैशाखी का सहारा लेते रहेंगे?
Wednesday, 14 September 2011
हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ!
सर्वप्रथम आप सभी लोगों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ! मुझे गर्व है कि मै एक हिन्दुस्तानी हूँ और हिंदी मेरी मातृभाषा है ! मगर दुःख इस बात का है कि आज भी हिंदुस्तान के अधिकांश लोग अपनी मातृभाषा हिंदी को वो सम्मान नहीं देते जिसकी वो हक़दार है ! बड़े दुःख की बात है ! जहाँ तक मुझे लगता है की मेरे देशवाशियों को हिंदी बोलने में शायद शर्म लगती है इसीलिए तो आज अधिकांश लोग हिंदी कम और अंग्रेजी भाषा को ज्यादा महत्त्व देते हैं !
हम राष्ट्रकवि भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पंक्तियों को भी भुला चुके हैं......जिनमें उन्होंने निज भाषा को ही उन्नति का कारण बताया है -
निज भाषा उन्नति अहे , सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा ज्ञान के , मिटे न कोई न सूल
.
Monday, 12 September 2011
आम आदमी को तो मरना ही है.........
मुंबई और दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद सरकार हर बार की तरह इस बार फिर अपने पुराने रटाए वादे दोहरा रही है! सवाल उठता है कि पहले के धमाकों के आरोपी ज्यादातर तो पकडे ही नहीं गए और जो पकडे भी गए उनको बिरयानी खिलाई जा रही! अब जब इनको पकड़ के बिरयानी ही खिलानी है, कोई सज़ा -वजा इनको देनी नहीं है, तो फिर जनता से झूठे वादे ही क्यों करते हैं? आम आदमी को तो मरना ही है! मरने दो! जिस दिन कोई बड़ा नेता विस्फोट की चपेट में आएगा उस दिन पता चलेगा आतंकवाद पीडतों का दर्द क्या होता है!
Saturday, 16 April 2011
धोनी को ही 'उत्तराखंड रत्न' क्यों ?
विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड रत्न देने की घोषणा की है. लेकिन क्या सही मायनों में केवल धोनी ही इस सम्मान के हकदार हैं ? क्या धोनी को यह सम्मान केवल विश्व विजेता टीम से अपना नाम जोड़ने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षा का परिणाम है? अगर नहीं तो उत्तराखंड के ऐसे कई सपूत हैं जिन्होने राज्य के कल्याण और विकास के लिए अपना पूरा जीवन ही लगा दिया. राज्य सरकार उनकी सुध क्यों नहीं लेती? मुझे नहीं याद की महेंद्र सिंह धोनी ने आज तक कभी भी खुद को उत्तराखंडी कहा हो. मैं व्यक्तिगत रूप से धोनी का सम्मान चाहता हूँ लेकिन साथ ही मेरा ये भी सोचना है कि केवल राज्य सरकार के वजाय धोनी भी इस बात को स्वीकार करें कि उत्तराखंड उनका मूल राज्य है और इस देवभूमि में जन्म लेकर वे गर्व का अनुभव करते हैं. वैसे प्रदेश सरकार को ये भी नहीं भूलना चाहिए की इसी राज्य के कई लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है....गढ़वाल एक्सप्रेस के नाम से प्रसिद्ध सुरेन्द्र भंडारी हों या अशोक चक्र विजेता स्व. भवानी दत्त जोशी...क्या ये लोग इस सम्मान के हकदार नहीं हैं? या फिर राज्य सरकार इन्हें इस सम्मान के लायक नहीं मानती! क्योंकि इन्हें सम्मान देने पर वह न्यूज़ राष्ट्रीय चैनलों मैं फ्लैश नहीं होगी...अख़बारों मैं लीड नहीं छपेगी.......और ऐसा राज्य सरकार नहीं चाहती.
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